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मंदिर में, ज्योत जले, गज़ानन हरे हरे

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  मंदिर में, ज्योत जले, गज़ानन हरे हरे ॥ गज़ानन, हरे हरे, गज़ानन हरे हरे ॥ तूने, भक्तों के, कष्ट हरे, गज़ानन हरे हरे । मंदिर में, ज्योत जले, गज़ानन ... पिता, तुम्हारे, भोले बाबा ॥ डम डम, डमरू बजे, गज़ानन हरे हरे । मंदिर में, ज्योत जले, गज़ानन... माता, तुम्हारी, गौरां मईया ॥ गोदी में, लाल धरे, गज़ानन हरे हरे । मंदिर में, ज्योत जले, गज़ानन... मामी, तुम्हारी, लक्ष्मी मईया ॥ धन, भंडार भरे, गज़ानन हरे हरे । मंदिर में, ज्योत जले, गज़ानन... पत्नी, तुम्हारी, ऋद्धि-सिद्धि मोतियन, माँग भरे, गज़ानन हरे हरे । मंदिर में, ज्योत जले, गज़ानन... मूषक, की है, तेरी सवारी ॥ लड्डुवन, भोग लगे, गज़ानन हरे हरे । मंदिर में, ज्योत जले, गज़ानन... पुत्र, तुम्हारे, शुभ और लाभ ॥ सब कुछ, मंगल करे, गज़ानन हरे हरे । मंदिर में, ज्योत जले, गज़ानन... भक्त, तुम्हारे, खड़े हाथ जोड़े ॥ सारे, विघ्न हरो, गज़ानन हरे हरे ।

गौरी गणेश मनाऊँ आज सुध लीजे हमारी

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गौरी गणेश मनाऊँ आज सुध लीजे हमारी… सुरहिन गैया को गोबर मँगाऊ, दिग धर अगना लीपाऊं, आज सुध लीजे हमारी, गौरी गणेश मनाऊँ आज सुध लीजे हमारी… गंगा जल से स्नान कराऊँ, पीताम्बर पहनाऊं, आज सुध लीजे हमारी, गौरी गणेश मनाऊँ आज सुध लीजे हमारी… हरी हरी दूब मैं खूब चढ़ाऊँ, चन्दन घोल लगाऊं आज सुध लीजे हमारी, गौरी गणेश मनाऊँ आज सुध लीजे हमारी... पहली पूजा करूँ तुम्हारी, पहली पूजा करू तुम्हारी, लड्डू भोग लगाऊं, आज सुध लीजे हमारी ... गौरी गणेश मनाऊँ आज सुध लीजे हमारी…

संतान सप्तमी व्रत कथा

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  । श्री संतान सप्तमी व्रत कथा । एक दिन महाराज युधिष्ठिर ने भगवान से कहा - हे प्रभू ! कोई ऐसा उत्तम व्रत बतलाइये जिसके प्रभाव से मनुष्य के सांसारिक दुःख दूर होकर वे पुत्र एवं पौत्रवान हो जाए । यह सुनकर भगवान बोले - हे राजन !तुमने बड़ा ही उत्तम प्रश्न किया है। मैं तुमको एक पौराणिक इतिहास सुनाता हूँ ,ध्यानपूर्वक सुनो! एक समय लोमष ऋषि ब्रजराज की मथुरापुरी में वसुदेव देवकी के घर गए । ऋषिराज को आया हुआ देख दोनों अंत्यंत प्रसन्न हुए तथा उनको उत्तम आसान पर बैठा कर उनका अनेक प्रकार से वंदन और सत्कार किया । फिर मुनि के चरणोदक से अपने घर तथा शरीर को प्रवित्र किया । वह प्रसन्न होकर उनको कथा सुनाने लगे । कथा कहते हुए लौमष ऋषि ने कहा की -हे देवकी ! दुष्ट दुराचारी कंस ने तुम्हारे कई पुत्र मार डेल हैं जिसके कारण तुम्हारा मन अत्यंत दुखी है । इसी प्रकार राजा नहुष की पत्नी चंद्रमुखी भी दुखी रहा करती थी, किन्तु उसने संतान सप्तमी का व्रत विधि विधान सहित किया । जिसके प्रताप से उनको संतान का सुख प्राप्त हुआ । यह सुनकर देवकी ने हाथ जोड़कर मुनि से कहा - हे ऋषिराज ! कृपा करके रानी चंद्रमुखी का सम्पूर्ण वृतां...

दूल्हा बन भोला आये हैं

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दूल्हा बन भोला आये हैं  नए नए बाराती लाये हैं  शीश भोले के सेहरा नहीं है  वो तो गंगा लपेटे आये हैं  माथे भोले के कलगी नहीं है  वो तो चंदा छमकाये आये हैं  गले भोले के हार नहीं है  वो तो नाग लपेटे आये हैं  हाथ भोले के कंकन नहीं है  वो तो बिच्छू लपेटे आये हैं  तन में भोले के वस्त्र नहीं है  वो तो भस्म लपेटे आये हैं  संग भोले के बाजा नहीं है  वो तो डमरू बजातेआये हैं   

आना पवनकुमार हमारे हरी कीर्तन में।

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आना पवनकुमार हमारे हरी कीर्तन में।  आना पवनकुमार हमारे हरी कीर्तन में।। आप भी आना संग राम जी को लाना।  सीता को संग ले आना  हमारे हरी कीर्तन में।। आप भी आना संग श्याम को लाना।  राधा को संग ले आना  हमारे हरी कीर्तन में।। आप भी आना संग विष्णु को लाना।  लक्ष्मी को संग ले आना  हमारे हरी कीर्तन में।। आप भी आना संग भोले को लाना।  गौरा को संग ले आना  हमारे हरी कीर्तन में।। आप भी आना संग ब्रह्मा  लाना।  सरस्वती संग ले आना  हमारे हरी कीर्तन में।।

आरती श्री हनुमान जी की / Aarti Shri Hanuman Ji Ki

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आरती कीजै हनुमान लला की | दुष्ट दलन रघुनाथ कला की || जाके बल से गिरिवर कांपे | रोग दोष जाके  निकट न झांके ||  अंजनि पुत्र महाबलदायी | संतन के प्रभु सदा सहाई ||  दे बीरा रघुनाथ पठाए | लंका जारि सिया सुध लाए ||  लंका सो कोट समुद्र सी खाई | जात पवनसुत बार न लाई ||  लंका जारि असुर संहारे | सियारामजी के काज संवारे ||  लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकरे | आनि संजीवन प्राण उबारे ||  पैठि पाताल तोरि जमकारे | अहिरावण की भुजा उखाड़े ||  बाएं भुजा असुर दल मारे |  दाहिने भुजा संतजन तारे ||  सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे | जय जय जय हनुमान उचारे ||  कंचन थार कपूर लौ छाई | आरती करत अंजना माई ||  लंक विध्वंस कीन्हि रघुराई | तुलसीदास प्रभु कीरति गाई ||  जो हनुमान जी की आरती गावै | बसि बैकुंठ परमपद पावै ||  आरती कीजै हनुमान लला की | दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ||

श्री शनिदेव आरती

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श्री शनिदेव आरती  जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी |   सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी || जय.||  श्याम अंक वक्र दृष्ट  चतुर्भुजा धारी |  नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी || जय.|| क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी |  मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी || जय.||  मोदक मिष्ठान पान चढ़त है सुपारी |  लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी || जय.||  देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी |  विश्वनाथ धारण ध्यान शरण हैं तुम्हारी || जय.|| जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी |   सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी || जय.|| 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

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श्री गणेश आरती  जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा | माता जिनकी पार्वती पिता महादेवा || जय. ||  फूल चढ़े पान चढ़े और चढे मेवा |  लड्डून के भोग लगे संत करे सेवा || जय. || एकदंत दयामंत चार भुजा धारी |  मस्तक सिंदूर सोहै मूस की सवारी || जय. || अंधन को आँख देत निर्धन को माया |  बांझन को पुत्र देत कोढ़न को काया || जय. || दीनन की लाज रखो शम्भु सुतवारी |  कामना को पूरा करो जाऊं बलिहारी || जय. || जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा |  माता जिनकी पार्वती पिता महादेवा || जय. ||

तारा है सारा जमाना, श्याम हमको भी तारो

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तारा है सारा जमाना  श्याम हमको भी तारो  तुमने प्रभु जी कुब्जा को तारा  चन्दन का करके बहाना   श्याम हमको भी तारो .....  तुमने प्रभु जी मीरा को तारा  वीणा का करके बहाना   श्याम हमको भी तारो .....  तुमने प्रभु जी गोपियों को तारा  वंशी का करके बहाना   श्याम हमको भी तारो .....  तुमने प्रभु जी अर्जुन को तारा  गीता का करके बहाना   श्याम हमको भी तारो .....  तुमने प्रभु जी भक्तों को तारा  भक्ति का करके बहाना   श्याम हमको भी तारो ..... 

स्वागत गीत - करें श्रीमान तुम्हारा अभिनन्दन

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स्वागत गीत  करें श्रीमान तुम्हारा अभिनन्दन  शिशु नादान तुम्हारा अभिनन्दन . . . . . सेवा-स्वागत, रीत न जाने,  भाव न जाने प्रीत न जाने  हम तो केवल इतना जाने  कि हो मेहमान तुम्हारा अभिनन्दन।  शिशु . . . . .  सुलभ न समुचित, सुख सुआसन  सेवा और स्वागत के साधन  दर्शन से हम हो गए पावन  हे क्षमा के निधान तुम्हारा अभिनन्दन।  शिशु . . . . . अन्धकार अन्तर में काला  नेह नज़र से करो उजाला  अर्पित है फूलों की माला   हे मेरे मेहमान तुम्हारा अभिनन्दन।  शिशु . . . . .